प्रशिक्षण कार्यक्रम

राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद् की यह नीति रही है कि वह उपभोगी संगठनों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करे। क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं. द्वारा वार्षिक कार्यक्रम सूची (प्रशिक्षण कार्यक्रम) को समय से तैयार किया जाता है तथा उसे संबंधित राज्य की सहकारी समिति के पंजीयक की अध्यक्षता में संपन्न कार्यक्रम सलाहकार समिति की बैठक में प्रस्तुत किया जाता है। वैमनीकाॅम के संबंध में कार्यक्रम सलाहकार समिति की अध्यक्षता रा.स.प्र.प. के अध्यक्ष द्वारा की जाती है। प्रत्येक संस्थान की प्रबंध समिति कार्यक्रम सूची को स्वीकृति प्रदान करती है। रा.स.प्र.प. द्वारा आयोजित निदेशकों के सम्मेलन में उपभोगी संगठनों की आवश्यकता के अनुरूप कार्यक्रमों को सुगठित रूप देने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।

1. वैमनीकाॅम पुणे

वैमनीकाॅम, पुणे सहकारी क्षेत्र का प्रमुख संस्थान है। यह भारत के सहकारी क्षेत्र में मानव संसाधन विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयासरत है। वैमनीकाॅम द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

प्रबंध में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम)

वर्ष 1993-94 से दो वर्ष की अवधि का प्रबंध में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (एग्री बिजनेस मैनेजमेंट) कार्यक्रम आरंभ किया गया। पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को सहकारी उद्यम के प्रबंध हेतु आवश्यक जानकारी, कौशल एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कराना था। यह डिप्लोमा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् से मान्यता प्राप्त है। यह भारतीय चार्टर्ड वित्तीय विश्लेषण संस्थान द्वारा भी प्रमाणित है। सहकारिताओं एवं उद्योगों की मौजूदा एवं भावी आवश्यकताओं से मेल मिलाने के लिए ग्रामीण प्रबंध संस्थान, आनंद (इरमा) के परामर्श से राष्ट्रीय संस्थान के पीजीडीएम कार्यक्रम की वर्ष 2004-2005 के दौरान पुनः संरचना की गई।

सहकारी व्यवसाय प्रबंध में डिप्लोमा पाठ्यक्रम (डीसीबीएम)

संस्थान के आरंभ होने से ही 36 सप्ताहों की अवधि वाले सहकारी व्यवसाय प्रबंध में डिप्लोमा पाठ्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम सहकारी संगठनों एवं सहकारी विभागों में कार्यरत वरिष्ठ स्तरीय सेवारत कार्मिकों के लिए तैयार किया गया है। इस पत्रोपाधि को वरिष्ठ पदों पर भर्ती के लिए शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है।

प्रबंध विकास कार्यक्रम

संस्थान द्वारा विभिन्न क्षेत्रों यथा सहकारी कानून, विपणन, क्रेडिट, बैंकिंग, डेयरी, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी आदि तथा सामयिक मुद्दों यथा ग्लोबलवार्मिंग, ऊर्जा संरक्षण, कारपोरेट गर्वनैंस, सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा, माइक्रो वित्त, नेतृत्व में ऊर्जा के मुद्दों, ई-व्यवसाय आदि में विविध प्रबंध विकास कार्यक्रम एवं सेमिनार आयोजित किए जाते हंै। यह क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं के संकाय के लिए भी संकाय विकास कार्यक्रम आयोजित करता है।

अनुसंधान एवं परामर्शदात्री सेवाएं

वैमनीकाॅम अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र है तथा यह उपभोगी संगठनों को परामर्शदात्री सेवाएं प्रदान करता है। यह विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा प्रबंध के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान कार्य के लिए मान्यता प्राप्त है। योजना आयोग, राज्य सरकारों तथा सहकारी संगठनों के सदस्यों द्वारा वैमनीकाॅम, पुणे द्वारा प्रदत्त अनुसंधान एवं परामर्शदात्री सेवाओं का लाभ उठाया जाता है।

2. क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान एवं सहकारी प्रबंध संस्थान

परिषद् की प्रशिक्षण योजनाएं बंगलौर, चंडीगढ़, गांधीनगर, कल्याणी एवं पटना स्थित पांच क्षेत्रीय प्रबंध संस्थानों तथा देश के अन्य भागों में स्थित 14 सहकारी प्रबंध संस्थानों द्वारा क्रियान्वित की जाती हंै। तमिलनाडु, महाराष्ट्र एवं केरल स्थित राज्यों में प्रत्येक में दो संस्थान हैं। क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान चंडीगढ़ द्वारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में स्थित सहकारी विभागों एवं संगठनों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है। सभी क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं प्रतिवर्ष कम से कम सहकारी प्रबंध में उच्चतर डिप्लोमा, क्षेत्रीय डिप्लोमा कार्यक्रमों एवं विभिन्न प्रबंध विकास कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

सहकारी प्रबंध में उच्चतर डिप्लोमा (एचडीसीएम)

प्रत्येक क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं. द्वारा सहकारी कार्मिकों के लिए नियमित रूप से सहकारी प्रबंध में 26 से 52 सप्ताह का उच्चतर डिप्लोमा का आयोजन किया जाता है।

सहकारी प्रबंध में उच्चतर डिप्लोमा (पत्राचार)

ऐसे सहकारी संस्थान/विभाग जो अपने पास उपलब्ध मानवशक्ति की कमी के कारण नियमित एच.डी.सी.एम पाठ्यक्रम में अपने अभ्यर्थियों को प्रायोजित करने की स्थिति में नहीं है, उनके लाभार्थ क्षे.स.प्र.सं. चंडीगढ़ तथा स.प्र.सं. देहरादून, नागपुर एवं पूना में हाल ही में एचडीसीएम (पत्राचार) पाठ्यक्रम शुरू किया गया। वर्ष 2009-2010 के दौरान इन संस्थानों ने 10 कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए एचडीसीएम पत्राचार पाठ्यक्रम में 435 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।

क्षेत्रीय डिप्लोमा एवं अल्पावधि कार्यक्रम

सहकारी प्रबंध में उच्चतर डिप्लोमा के अलावा क्षे.स.प्र.सं/स.प्र.सं द्वारा सहकारी आंदोलन के विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु क्षेत्रीय डिप्लोमा कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। यह क्षेत्रीय डिप्लोमा कार्यक्रम सहकारी बैंकिंग, शहरी सहकारी बैंकिंग, कृषि ग्रामीण विकास बैंकिंग (ए.आर.डी.बी.) सहकारी विपणन, सहकारी लेखा परीक्षा, उपभोक्ता सहकारिताएं, औद्योगिक सहकारिताएं, हथकरघा सहकारिताओं, सहकारी विपणन एवं प्रसंस्करण, कम्प्यूटर, इत्यादि क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं।

अल्पावधि कार्यक्रम

संस्थान सहकारी आंदोलन के प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न कार्यकारियों के लिए अल्पावधि कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है। इन कार्यक्रमों में सामान्य सहकारी प्रबंध, सहकारी क्रेडिट एवं बैंकिंग, शहरी सहकारी बैंकिंग, दीर्घावधि वित्त, सहकारी विपणन एवं प्रसंस्करण, उपभोक्ता सहकारी प्रबंध, औद्योगिक सहकारी प्रबंध, हथकरघा सहकारी प्रबंध, सहकारी लेखा एवं लेखा परीक्षा, सहकारी विधि एवं सम्बद्ध विधियां, सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण आदि शामिल हंै। अन्य क्षेत्रों में डेयरी, नेतृत्व विकास, आवास, लैम्पस/पैक्स, महिला सहकारिताएं, कृषि बीमा, वसूली प्रबंध, स्वयं सेवा दलों का प्रबंध, श्रम सहकारिता, एग्री क्लीनिक एवं एग्री व्यवसाय, कृषि विस्तार, मध्यस्थता तथा परिसमापन, परियोजना नियतन, वैधानिक पहलू, बागबानी सहकारिताएं, गन्ना सहकारिताएं, सिंचाई सहकारिताएं, निवेश पोर्टफोलियो प्रबंध, सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग, संगठनात्मक व्यवहार, व्यक्तित्व विकास, प्रबंधकीय उत्कृष्टता, क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।

औद्योगिक सहकारिताओं के लिए प्रबंध प्रशिक्षण

औद्योगिक सहकारिताओं के कार्मिकों के लिए प्रबंध प्रशिक्षण की योजना उद्योग मंत्रालय, एआरआई/एसएसआई विभाग द्वारा वित्तपोषित की जाती थी। इस योजना का बुनियादी प्रमुख उद्देश्य औद्योगिक सहकारिताओं के कार्मिकों को प्रशिक्षित करना रहा है ताकि वह औद्योगिक सहकारिताओं को व्यवहार्य सक्षम सहकारिताओं के रूप में संचालित कर सकें। कुछ वर्षों से उद्योग मंत्रालय द्वारा औद्योगिक योजना का वित्तपोषण निरस्त कर दिया गया है। तथापि उपभोगी संगठनों की मांग के अनुसार क्षेत्रीय सहकारी/सहकारी प्रबंध संस्थानों द्वारा औद्योगिक सहकारी प्रबंध पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

हथकरघा सहकारिताओं के लिए प्रबंध प्रशिक्षण

हथकरघा सहकारिताओं के प्रबंध में लगे कार्मिकों के लिए 1979 में जो प्रशिक्षण योजना आरंभ की गई थी, वह भारत सरकार, कपड़ा मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित है। हथकरघा सहकारी प्रबंध में 12 सप्ताहों की अवधि वाले डिप्लोमा कार्यक्रम की रचना प्राथमिक हथकरघा सहकारिताओं के प्रबंधकों एवं सचिवों, राज्य एवं केंद्रीय हथकरघा समितियों से जुडे़ पर्यवेक्षकीय संवर्ग के कार्मिकों के साथ-साथ सहकारिताओं एवं अन्य संबद्ध विभागों से सरोकार रखने वाले व्यक्तियों को प्रशिक्षित कराने के उद्देश्य से की गई है। कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषण निरस्त कर दिया गया है। तथापि उपभोगी संगठनों की मांग के अनुरूप क्षेत्रीय सहकारी/सहकारी प्रबंध संस्थान हथकरघा पर कार्यक्रमों के आयोजन को जारी रखे हुए हैं।

कम्प्यूटर केंद्र

प्रत्येक क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं में कम्प्यूटरों के नवीनतम संरूपों सहित सुसज्जित कम्प्यूटर केंद्र हैं जिसे सहकारी क्षेत्र में कार्यरत कार्मिकों के लिए कम्प्यूटर प्रयोग में डिप्लोमा, प्रमाणपत्र एवं अल्पावधि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन हेतु प्रयोग में लाया जाता है। कम्प्यूटर केंद्रों का उपयोग सहकारी प्रबंध में उच्चतर डिप्लोमा में प्रबंध सूचना प्रणाली (कम्प्यूटर) के विषयों एवं अन्य क्षेत्रीय पत्रोपाधि कार्यक्रमों के आयोजन हेतु भी किया जाता है। इसके अलावा एमबीए, पीजीडीएम, बी.बी.ए. आदि प्रोफेशनल कार्यक्रमों के लिए भी कम्प्यूटर केन्द्र का उपयोग किया जाता है।

राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उच्च मानक स्थापित करने का सुनिश्चय करने के लिए परिषद् मानव संसाधन विकास से संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बनाए रखती है।

वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान एवं क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं. ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तरीय संगठनों यथा आईएलओ, एनआईसीडी, पोलोगोला (श्रीलंका), एसएचडीआई, एडिस आबाद (इथोपिया) इफको, कृभको, एन.सी.सी.ई. एन.सी.यू.आई, एन.डी.डी.बी. एन.एफ.एल.सी., फिशकोफैड, आई.आई.बी.एफ, बर्ड, नाबार्ड, आई.एफ.एफ.डी.सी, एन.आई.ए.एम. मैनेज, नैफकब आदि के सहयोग से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया।

उत्तरी पूर्वी क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रम

भारत सरकार उत्तरी पूर्वी राज्यों एवं सिक्किम के दु्रतगामी सामाजिक-आर्थिक विकास पर विशेष बल देती रही है। इन राज्यों की विशिष्ट परियोजनाओं के निष्पादन हेतु वित्त मंत्रालय द्वारा केंद्रीय संसाधनों की न समाप्त होने वाली संचित राशि स्वीकृत की गई है। भारत सरकार के अधिकांश मंत्रालयों/विभागों से इन विशिष्ट कार्यक्रमों के आयोजन हेतु बजट विनियोजनों का 10 प्रतिशत हिस्सा रखने का अनुरोध किया गया है। 21-22 जनवरी, 2001 को उत्तर-पूर्वी राज्यों के राज्यपालों एवं मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में योजना/कार्यक्रमों के एक पैकेज की घोषणा की गई। उत्तरी-पूर्वीे राज्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के प्रबोधन हेतु रा.स.प्र. परिषद्, मुख्यालय द्वारा निदेशक की अध्यक्षता में एक सैल बनाया गया है। उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में स्थित संस्थानों द्वारा नेतृत्व विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

वैमनीकाॅम/क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं. के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की एक झलक
विवरण अवधि
सहकारी व्यवसाय प्रबंध में डिप्लोमा (डीसीबीएम) 36 सप्ताहों का वैमनीकाॅम, पुणे में
प्रबंध में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम) 2 वर्ष का वैमनीकाॅम, पुणे एवं गांधीनगर में
व्यवसाय प्रशासन में निष्णात (एम.बी.ए.) क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं. बंगलौर, भुवनेश्वर, भोपाल, देहरादून, लखनऊ, कन्नूर, तिरूवनंतपुरम, मदुरै एवं नागपुर
सहकारी प्रबंध में उच्चतर डिप्लोमा (एचडीसीएम) 26-52 सप्ताह सभी क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं.
क्षेत्रीय डिप्लोमा कार्यक्रम 12 सप्ताह – क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं.
प्रबंध विकास कार्यक्रम 3-5 दिन वैमनीकाॅम/क्षे.स.प्र.सं./स.प्र.सं.

सेमीनार, वर्कशाप्स एवं परामर्शदात्री सेवाएं

इन संस्थानों द्वारा सामयिक विषयों पर बड़ी संख्या में वर्कशाप्स, सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, उपभोगी संगठनों की आवश्यकताओं के आधार पर कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। क्षे.स.प्र.सं. तथा स.प्र.संस्थान अनुसंधान गतिविधियां आयोजित करते हैं तथा उपभोगी सहकारी संगठनों को परामर्शदात्री सेवाएं प्रदान करते हैं।

कनिष्ठ सहकारी प्रशिक्षण केंद्रों को सहायता

सहकारी विभागों/संस्थानों के कनिष्ठ कार्यकारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए समूचे देश में 109 कनिष्ठ सहकारी प्रशिक्षण केंद्र (जेसीटीसी) हैं। इन केंद्रों को सहायता रा0स0प्र0 परिषद् द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता विशेषरूप से पुस्तकालय, कक्षागत सुविधाओं, शिक्षण सहायता, संकाय विकास तथा पाठ्यक्रम रूपरेखा आदि क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाती है।

संबंधित क्षेत्र के क0स0प्र0 कंेद्रों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रबोधन एवं मूल्याकंन तथा क0स0प्र0 केंद्रों के संकाय के लिए प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण (टीओटी) आयोजित करने के लिए रा0स0प्र0 परिषद् के क्षे0स0प्र0सं0/स0¬प्र0सं0 के सभी निदेशकों को नोडल अधिकारी के रूप में मनोनित किया गया है।

(A Grant-in-Aid Institution under Ministry of Agriculture, Government Of India)